Gulzar Shayari | Gulzar ki Shayari in Hindi

Gulzar Shayari: दिल को जो शब्द छू जाए वह कलम है गुलज़ार साहब की आज के इस पोस्ट हम साहब के खजाने से कुछ अनमोल शायरी लाएं है, जिन्हें पढ़कर आप भी मंत्रमुग्ध हो जाएंगे गुलजार साहब की कलम ना केवल भारत के लोगों के द्वारा पसंद की जाती है बल्कि गुलजार साहब के चाहने वाले भारत के अलावा विभिन्न देशों में है, उन्होने 1963 में आई फिल्म बंदिनी से बतौर गीतकार अपने करियर की शुरुआत की।

आज के इस लेख में गुलजार साहब के कुछ अनमोल Gulzar Ki Shayari आपके लिए लाएं है…

गुलजार साहब ने अपना नाम विभिन्न क्षेत्रों में बनाया है उनके लेखन में एक अलग जादू है जो लोगों को द्वारा पसंद किया जाता है आइए आप और हम इस का आनंद लें…

Gulzar Shayari उनके द्वारा लिखे गए संगीत में मधुर इतने सुनने में अच्छे लगते हैं कि वह सभी सुपरहिट है जिसमें तुझसे नाराज नहीं, इस मोड़ से जाते हैं, नाम गुम जाएगा, आने वाला पल जाने वाला पल इत्यादि है, दिल को छु लेने वाले शब्दों के इस्तेमाल से जज़्बातों को सामने रखना ही उनकी ताकत है।

उन्होने कोशिश, परिचय, मौसम, आँधी जैसी फिल्में बनाई। इन्हे पद्मभूषण, साहित्य अकादमी, दादा साहेब फाल्के अवार्ड, के अलावा नेशनल फिल्म अवार्ड तथा एक ग्रैमी अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।

गुलज़ार साहब को कौन नहीं जानता। वैसे तो गुलज़ार साहब कमाल की रोमांटिक शायरी लिखते हैं लेकिन साथ ही ज़िंदगी के बारे में बहुत प्रेरक बातें भी लिखते हैं।

मित्रों इस पोस्ट में गुलजार साहब की मशहूर Gulzar Shayari जो काफी पसंद की गयी हैं. वह यहाँ पर दी गयी हैं, आपको यह सब Gulzar साहब Ki Shayari बहुत पसंद आएगी.

Gulzar Shayari

Gulzar Shayari

शायर बनना बहुत आसान हैं,
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए।

कुछ अलग करना हो तो
भीड़ से हट के चलिए,
भीड़ साहस तो देती हैं
मगर पहचान छिन लेती हैं – Gulzar Shayari

इतना क्यों सिखाई जा रही हो जिंदगी
हमें कौन से सदिया गुजारनी है यहां

मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में,
बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका।

Gulzar Shayari

आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं

मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ

Aankon Se Aansuon Ke Marasim Purane Hain

Mehman Ye Ghar Mein Aae To Chubhta Nahi Dhuan.

तकलीफ खुद ही कम हो गई जब अपनों से उम्मीद कम हो गई – Gulzar Shayari

अपने साये पर पाव रखता हूं छांव छालों को नरम लगती है

दिन कुछ ऐसे गुजरता है कोई जैसे ऐसा उतारता है

आईना देखकर तसल्ली हुई हमको इस घर में जानता है कोई

Gulzar Shayari

जोर से बज ना उठे पैरों की आवाज कहीं, कांच के ख्वाब है बिखरे हुए तन्हाई में

Gulzar Shayari

Gulzar Shayari

सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यों जी भरा सा रहता है

Gulzar Shayari

आंखों के पोछने से लगा आगका पता, यू चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं दुवां

Gulzar Shayari

गुलों को सुनना ज़रा तुम सदाएँ भेजी हैं

गुलों के हाथ बहुत सी दुआएँ भेजी हैं

Gulon Ko Sunana Zara Tum Sadaen Bheji Hain

Gulon Ke Haath Abhut Si Duaen Bheji Hain

Gulzar Shayari

मिलता तो बहुत कुछ है इस जिंदगी में बस हम गिनती उसी की करते हैं जो हासिल ना हो सका (10)

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