Gulzar Shayari | Gulzar ki Shayari in Hindi

Gulzar Shayari | Gulzar ki Shayari in Hindi

Gulzar ki Shayari in Hindi

यह शुक्र है कि मेरे पास तेरा गम तो रहा वरना जिंदगी भर को रुला दिया होता

Gulzar ki Shayari in Hindi

एक सन्नाटा दबे पांव गया हो जैसे दिल से एक खौफ सा गुजरा है बिछड़ जाने का

Gulzar ki Shayari in Hindi

दिल में कोई जलता है शायद धुआ सा लगता है आंख में कुछ छुपता है शायद सपना सुलगता है

Gulzar ki Shayari in Hindi

Gulzar ki Shayari in Hindi

बेसबाब मुस्कुरा रहा है चांद को साजिश छुपा रहा है चांद

Gulzar ki Shayari in Hindi

Gulzar ki Shayari in Hindi

आदतन तुमने कर दिया वादे थे आदतन हमने ऐतबार किया

Gulzar ki Shayari in Hindi

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आंखों और कानों में कुछ सन्नाटे से भर जाते हैं क्या तुमने उड़ती देखी है रेत कभी तन्हाई की

Gulzar ki Shayari in Hindi

Gulzar ki Shayari in Hindi

मैं चुप कर आता हूं हर सब उमड़ती बारिश को मगर यह रोज गई बात छोड़ देती है

Gulzar ki Shayari in Hindi

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चांद की नब्ज देखना उठकर रात के साथ गर्म लगती है

Gulzar ki Shayari in Hindi

Gulzar ki Shayari in Hindi

बहुत अंदर तक जला देती हैं वह शिकायतें जो बयां नहीं होती

Gulzar ki Shayari in Hindi

भरे हैं रात के रेजे कुछ ऐसे आंखों में उजाला हो तो हम आंखें झपकते रहते हैं

Gulzar ki Shayari in Hindi (80)

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